विवरण
स्कूल के मैदान में एक ऐसी खामोशी छाई रहती है जो दिल को छू जाती है। जब तक कि बच्चे एक दिन हिम्मत जुटाकर उससे मुंह फेरना बंद नहीं कर देते। यह एक कोमल कहानी है जो बच्चों को धमकाने की घटनाओं में मूकदर्शक की भूमिका को समझने में मदद करती है।.
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